
साईं बाबा अपने चमतकारों से मुर्दे में भी जान डाल देते थे...... लेकिन बाबा हर रोज सुबह शिर्डी गावँ के घर घर जाकर भिक्शा लेते थे ........बाबा एक सहज सन्देश देना चाह्ते थे ...... बाबा चमत्कार से अन्न चावल के गौदाम भर सकते थे , लेकिन बाबा घर घर जाकर भिक्शा लेते थे....... और इकटठा किये हुए अन्न चावल को अप्ने हाथों से पकाते थे ........ गरम चवलों के बर्तन मे अप्ने हाथ को डाल कर हिलाते थे , जिस्से उस भोजन मे अम्रित रस घुल जाता था ........और उस भोजन को गावँ के लोगों को प्यार से खिलाते थे ........इस सहज कर्म से वो गावँ वालों मे प्यार और भाइचारे का सन्देश देते थे ...........

जय साईं राम
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